
हौसले को सलाम: अस्तित्व बचाने के लिए लड़ रही पौराणिक मनोरमा नदी को पुनर्जीवित कर रचा इतिहास
300 मीटर तक नदी की सफाई में निकला 700 किलो कचरा
एक वीडियो के जरिए इंस्टाग्राम पर 65 हजार, फेसबुक पर 50 हजार व यूट्यूब पर 10 से 20 हजार लोग अभियान से जुड़े
बस्ती। ‘ मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंजिल, लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया…. सुप्रसिद्ध शायर मजरूह सुल्तानपुरी की ये पंक्तियां, जनपद के उन युवाओं पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं, जिन्होंने बिना किसी सहायता के पर्यावरण संरक्षण को लेकर ऐसी मुहिम छेड़ी और युवाओं ने इतिहास रच दिया और अब लोग उनके हौसले को सलाम कर रहे हैं।
जी हाँ, हम बात कर रहे हैं, बस्ती जनपद के रहने वाले (Social worker Akash Gupta) और उनके कुछ साथियों की, जिन्होंने महज 60 दिनों तक 5 घंटे की मेहनत से पौराणिक मनोरमा नदी के अस्तित्व को फिर से पुनर्जीवित कर इतिहास रच दिया। युवाओं ने नदी को स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए हर्रैया विधानसभा (Harraiya Assembly) के लजघटा गांव से अभियान की शुरुआत की, जो अभी 300 मीटर तक साफ हो चुकी है। इन युवाओं के प्रयास से नदी अब स्वच्छ और सुंदर दिख रही है, लोग इस में स्नान कर रहे हैं और बेजुबान जानवर अपनी प्यास बुझा रहे हैं।
नदी सफाई कर रहे आकाश गुप्ता ने बताया कि हम लोगो ने कार्य शुरू करने के साथ ही वीडियो भी बनाया था। जिसका असर यह हुआ कि अब इस अभियान से इंस्टाग्राम (Instagram) पर 65 हजार, फेसबुक (Facebook) पर 50 हजार और यूट्यूब पर 10 से 20 हजार लोग जुड़ चुके हैं। हमारा प्रयास होगा कि नदी के आस-पास गांव में जितने भी लोग हैं, वे सभी युवा इस अभियान से जुड़कर नदी पूरी तरह स्वच्छ और निर्मल करने सहयोग करें, ताकि नदी के अस्तित्व को बचाया जा सके। क्योंकि पांच-सात लोग नदी को पूरा साफ नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा कि और यह तभी संभव है जब हम सभी एक साथ जुड़ेंगे। वहीं एक और युवा ने प्रधानमंत्री मोदी और सीएम योगी से नदी सफाई की प्रेरणा को बताया और प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) और सीएम योगी (CM Yogi) को धन्यवाद ज्ञापन किया।

प्रतिदिन 5 घंटे की अथक मेहनत से 700 किलो कचरा बाहर निकला
दरअसल, बस्ती जिले में स्थित पौराणिक मनोरमा नदी कभी धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत की पहचान रखने वाली थी, लेकिन ये नदी अब गंदगी और प्लास्टिक से भर चुकी थी। हालात ऐसे हो गए थे कि कई जगह नदी नाले जैसी दिखाई देने लगी। समाजसेवी आकाश गुप्ता (Social worker Akash Gupta) ने अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर नदी को बचाने का संकल्प लिया।शुरुआत में आकाश अकेले नदी में उतरकर कचरा निकालते थे, लेकिन धीरे-धीरे उनके साथ युवाओं का कारवां जुड़ता चला गया। देखते ही देखते 6 से 7 युवाओं की टीम तैयार हो गई। टीम रोज़ाना 4 से 5 घंटे तक नदी में उतरकर प्लास्टिक, बोतलें, पॉलीथिन और जलकुंभी और कचरा निकालने में जुट गई। करीब 60 दिनों तक चले इस अभियान में लगभग 700 किलो कचरा बाहर निकाला गया।
चार दशक पहले पानी पीने के लिए एक मात्र साधन थी यह नदी
लगभग 4 दशक पहले गांव वासियों, पशुओं के नहाने, पानी पीने के लिए यह नदी एक मात्र साधन थी। लेकिन झड़ी, जलकुंभी गंदगी के कारण इस पानी को जानवर भी नहीं पी पाते है। यही कारण है कि इस नदी को साफ करने के लिए इन युवकों ने बीड़ा उठाया जो 65 दिन की कड़ी मेहत करके 300 मीटर नदी को साफ करके निर्मल और स्वच्छ बनाने का कार्य किया है।
पौराणिक मनोरमा नदी की सफाई को लेकर यह बोले विधायक
बीजेपी हरैया विधायक अजय सिंह ने बताया कि 2017-18 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) को बुलाकर मखौड़ा धाम से मनोवर नदी का सफाई अभियान (Cleaning Campaign) शुरू कराया था। 15 दिन हमने यह अभियान चला दिया, उसके बाद पूरा जिला प्रशासन ने संज्ञान लिया। जब-जब मैं अभियान चलाता हूं तब तक सरकार उस पर संज्ञान लेती है और सफाई अभियान शुरू होता है। मेरा मानना ये हैं कि शहवाल सफाई से नदियों की सफाई नहीं होती, शहवाल एक हफ्ते में फिर जन्म ले लेते हैं।
आप देखते हैं कभी घाघरा में शहवाल नहीं होता है क्योंकि उसमें घाघरा का पानी आता है और वह हिमालय का पानी जब एक्सेस (Access) होता है, जब बाढ़ के रूप में एक बंधे को तोड़ता है, बाढ़ के रूप में एक समुद्र का विकराल रूप लेता है। तो हमें व्यवस्था बनाने के लिए हमारे तालाब, हमारी नदियां, छोटी नदिया हमारे यहां हैं Economic Globalization से पूरी दुनिया को फायदा हुआ और भारत को इससे ज्यादा बहुत फायदा हुआ है।
Water Globalization पूरी दुनिया का मुद्दा है और भारत के लिए बहुत बड़ा मुद्दा है। क्योंकि हम डेढ़ सौ करोड़ लोग हैं, सभी नदियों को झीलों से मिलना चाहिए। विधायक ने सरकार से मांग की है कि आप Water Globalization करिए 2047 में भारत को विकसित भारत बनने से कोई रोक नहीं सकता।

